स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0 के अंतर्गत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन के मार्गदर्शन में नगरीय निकायों में कार्यरत डी-सिल्जिंग स्टाफ के लिए “यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट एवं सीवरेज प्रबंधन” विषय पर क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन शहडोल स्थित सूर्या इंटरनेशनल होटल में किया गया। संपूर्ण आयोजन को जीरो वेस्ट अवधारणा के अनुरूप आयोजित किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य डी-सिल्जिंग कार्य से जुड़े कर्मचारियों को सेप्टिक टैंक एवं फीकल स्लज के सुरक्षित प्रबंधन, डी-सिल्जिंग की मानक प्रक्रिया, कार्यस्थल पर सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के उचित उपयोग तथा स्लज के सुरक्षित परिवहन एवं निपटान के संबंध में तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ शहडोल एवं रीवा संभाग के संयुक्त संचालक श्री हिमांशु भट्ट एवं शहडोल ईई श्री देवेन्द्र कौल द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

अपने संबोधन में श्री हिमांशु भट्ट ने कहा कि डी-सिल्जिंग कार्य से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षित कार्यप्रणाली, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के नियमित उपयोग और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन कर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ती है और फीकल स्लज के सुरक्षित प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने कार्यस्थल पर अनिवार्य रूप से लागू करने तथा नागरिकों को भी स्वच्छता एवं सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

शहडोल ईई श्री देवेन्द्र कौल ने जानकारी दी कि हम जो पानी का उपयोग करते हैं, उसमें 20 प्रतिशत ही उपयोग में आता है, जबकि बाकी 80 प्रतिशत वेस्ट हो जाता है। इस वेस्ट पानी का प्रबंधन किस तरह किया जाएगा, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को दी जाएगी।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सफाई कार्य से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा एवं कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाना आवश्यक है। साथ ही आम नागरिकों में भी स्वच्छता एवं सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहर के निर्माण में नागरिकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सेप्टिक टैंक की डी-सिल्जिंग एवं एम्प्टींग प्रक्रिया, मैनुअल एवं मैकेनिकल सफाई, फीकल स्लज की सुरक्षित हैंडलिंग, परिवहन तथा सुरक्षित निपटान की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। कार्य के दौरान संभावित जोखिमों एवं दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) को सही तरीके से पहनने एवं उतारने (Donning & Doffing), उनके रखरखाव तथा उपयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियां अपनाने तथा निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान मैनहोल एवं सेप्टिक टैंक की मैकेनिकल क्लीनिंग का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया। इसके माध्यम से मशीनों एवं उपकरणों के सुरक्षित उपयोग की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों की सफाई तथा अपशिष्ट एवं स्लज के सुरक्षित प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।

कार्यशाला में कुल 67 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में ओपन सेशन एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें डी-सिल्जिंग कार्य के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं तथा कार्यप्रणाली में सुधार के सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण में सफलतापूर्वक सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ श्री आशीष बिश्वास द्वारा प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन फीडबैक फाउंडेशन की ओर से श्री संदीप सोनी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में शहडोल संभाग से संबंधित अधिकारी-कर्मचारी तथा डी-सिल्जिंग कार्य से जुड़े कर्मचारी एवं स्वच्छता पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री देवेंद्र कोल, सुश्री पल्लवी सिंह एवं श्री सज्जन सिंह सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों ने भी सहभागिता की।