उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं के लिए साहस, मित्रता और कृतज्ञता को जीवन के जरूरी मूल्य बताया। उन्होंने भगवान राम के संघर्ष और कृष्ण-सुदामा की मित्रता के प्रसंगों के जरिए इन गुणों को समझाया।

चुनौतियों के बीच साहस की सीख

मुख्यमंत्री ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा राम और लक्ष्मण पर जताए गए भरोसे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम के जीवन से पता चलता है कि सफलता कठिनाइयों का सामना करने और मनोबल बनाए रखने से मिलती है।

खास बातें

  • मुख्यमंत्री ने चुनौतियों का सामना करने के लिए राम के चरित्र से प्रेरणा लेने को कहा
  • सांदीपनि आश्रम का उल्लेख कर कृष्ण-सुदामा की मित्रता को युवाओं के लिए उदाहरण बताया
  • मिथिलेशनंदनी शरण जी महाराज ने राम के चरित्र में कृतज्ञता को प्रमुख गुण बताया

उन्होंने स्वयंवर, वनवास और सीता हरण के बाद रावण से संघर्ष के प्रसंगों को युवाओं के सामने रखा। उनका कहना था कि चुनौती वाले समय में दिखाई गई हिम्मत ही व्यक्ति को सफलता तक पहुंचाती है।

सांदीपनि आश्रम से मित्रता का संदेश

राधा अष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण और राधा का स्मरण किया। उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम को कृष्ण और सुदामा की मित्रता का बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि संकट में मित्र की सहायता इस तरह करनी चाहिए कि उसे अपमानित महसूस न हो।

उन्होंने महाभारत के द्रुपद और द्रोणाचार्य के प्रसंग से मित्र के अपमान के परिणाम को भी समझाया। मुख्यमंत्री ने युवाओं से संबंधों में सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखने की बात कही।

समापन संबोधन में श्री मिथिलेशनंदनी शरण जी महाराज ने बताया कि तीन दिनों के आयोजन में देशभर से आए विद्वानों ने भाग लिया। उन्होंने भगवान राम के चरित्र में कृतज्ञता को मनुष्यता का प्रमुख गुण बताते हुए आयोजन में सहयोग करने वाली सरकार, निकायों और संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।