उज्जैन में सिंहस्थ से पहले शहर के चौराहों को चरणबद्ध तरीके से संवारने की तैयारी है। संभाग आयुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने नगर निगम को ऐसे चौराहों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जहां सौंदर्यीकरण का काम पहले शुरू किया जा सकता है।

निर्माण वाले चौराहे दूसरे चरण में

शहर के मध्य जिन स्थानों पर सड़क निर्माण या चौड़ीकरण चल रहा है, वहां के चौराहों को दूसरे चरण में लिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पहले उन जगहों पर काम शुरू करना है जहां दूसरी निर्माण गतिविधियां बाधा नहीं बनेंगी।

खास बातें

  • पहले उन चौराहों का सौंदर्यीकरण होगा जहां सड़क निर्माण या चौड़ीकरण नहीं चल रहा
  • मंदिर विकास, स्वागत द्वार और सड़क चौड़ीकरण के काम अभी टेंडर प्रक्रिया में हैं
  • शिप्रा के पानी की गुणवत्ता, सीवरेज और जल प्रदाय योजनाओं की भी समीक्षा हुई

बैठक में नगर निगम, स्मार्ट सिटी और उज्जैन विकास प्राधिकरण की उन परियोजनाओं की समीक्षा हुई जो अभी टेंडर प्रक्रिया में हैं। जमीन अधिग्रहण और दूसरी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इनके टेंडर शीघ्र जारी करने को कहा गया है।

मंदिर विकास और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं

प्रस्तावित कामों में शनि एवं नवग्रह मंदिर का विकास, 84 महादेव मंदिरों का विकास और शहर के प्रवेश मार्गों पर स्वागत द्वार बनाना शामिल है। हरसिद्धि से अंकपात-खाक चौक तथा महाराजवाड़ा चौराहे से हरसिद्धि मंदिर होते हुए शिप्रा नदी तक सड़क चौड़ीकरण पर भी चर्चा हुई।

रेलवे के प्रस्तावित स्काईवॉक और मल्टी हब ट्रांजिट के साथ शक्करवासा-पंचकोशी मार्ग की कार्ययोजना पर दिशा-निर्देश दिए गए। शंकराचार्य चौराहा-दत्त अखाड़ा-भूखी माता-उजड़खेड़ा हनुमान से बड़नगर रोड को जोड़ने वाली सड़क और पिपली नाका से गढ़ कालिका मंदिर तक प्रस्तावित सड़क भी समीक्षा में शामिल रही।

सीवरेज, जल प्रदाय और शिप्रा पर भी निर्देश

नगर निगम के सीवरेज कार्यों, जल प्रदाय योजना और सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी में पानी की गुणवत्ता बनाए रखने से जुड़े प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और संबंधित संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे।